भारतीय राजनीति : वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियाँ
- Aug 25, 2025
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भारतीय राजनीति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ लोकतंत्र की जड़ों को और गहरा करने की आवश्यकता है। संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक ढाँचा विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक प्रयोग माना जाता है, लेकिन समय–समय पर इसके सामने कई चुनौतियाँ भी आती रही हैं।
सबसे बड़ी चुनौती राजनीति में बढ़ता ध्रुवीकरण है। दलों के बीच वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह मतभेद व्यक्तिगत आक्षेपों और समाज को बाँटने तक पहुँच जाए तो लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह लगने लगता है।
दूसरी चुनौती है भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी। तकनीक और डिजिटलीकरण के इस युग में जनता पारदर्शी शासन चाहती है। हालाँकि कुछ सुधार हुए हैं, लेकिन अब भी राजनीतिक वित्त पोषण और चुनावी खर्च जैसे मुद्दों पर स्पष्टता की आवश्यकता है।
तीसरी महत्वपूर्ण चुनौती है युवाओं और महिलाओं की भागीदारी। भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है, लेकिन संसद और विधानसभाओं में उनकी संख्या सीमित है। इसी तरह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए और ठोस कदम उठाने होंगे।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने राजनीति की शैली बदल दी है। अब जनता तक पहुँचने का सबसे आसान माध्यम ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म हैं। इसका सकारात्मक पहलू यह है कि सूचना तुरंत पहुँचती है, लेकिन नकारात्मक पहलू यह है कि झूठी खबरें और भ्रामक जानकारी भी उतनी ही तेजी से फैल जाती है।
अंत में कहा जा सकता है कि भारतीय राजनीति का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को सर्वोपरि रखा जाएगा। लोकतंत्र सिर्फ़ चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें जनता और जनप्रतिनिधि दोनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
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